बातें!
क्या हो गया अगर जो तुम चाहते थे वो नही हुआ? हां! दर्द तो होगा ही! किसने कहा नहीं होगा? दिल से चाहते थे, मेहनत भी की थी, दिन रात सब एक कर तो दिया था। नही हुआ फिर भी! तो क्या हुआ? कोशिश की थी ना? खुद ने अभी हामी भरी थी मेहनत में कमी न थी, है ना? तो फिर परेशान क्यों होना? इसके अलावा और कुछ कर सकते थे? अरे बताओ? मुझे नहीं, खुद को! खुद को बताओ! मेहनत कर ली, अकाउंट बंद कर दिए सारे सोशल मीडिया के, या चलाना कम कर दिया, क्रिकेट बंद कर दिया, घूमना बंद कर दिया, वजन बढ़ गया बैठे बैठे, तोंद आ गई, मूवीज कम कर दी देखना, सारे त्याग, भले कितने छोटे हो, किए थे ना? क्या हो गया अगर जो तुम चाहते थे वो नही हुआ? रोने से तो कुछ होगा नही, लिख के लेलो। ना ही किसी पर थोप सकते हो ये हार। और हां, तैयार रहना, लोग बोलेंगे हार गया/हार गयी, और वो गलत भी नहीं है, हारे तो है, पर क्या बिना लड़े? उनसे मत पूछना ये, खुद से पूछना। रोतला उदास चेहरा तुम्हारा किसी को नही पसंद। मतलब जितने बचे कूचे है उन्हे तो नही ही है! उठो, सोचो आगे क्या करना है, शुरू से शुरू होगा सबकुछ, बिलकुल! पर अच्छी बात ये है कि तुम खेलना...